ईरान की क्रांति को, जनता पर आधारित क्रांति कहा जाता है जिसकी एक मुख्य वजह, इमाम खुमैनी के नेतृत्व में जनता का विश्वास है। यही वजह है कि ईरान की इस्लामी क्रांति का अध्ययन करने वाले, क्रांति की सफलता का एक मुख्य कारण, इमाम खुमैनी के नेतृत्व को बताते हैं।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई कहते हैं कि यह क्रांति, इमाम खुमैनी के नाम के बिना दुनिया में कहीं भी नहीं जानी जाती। विशेषज्ञों का यह कहना है कि इमाम खुमैनी जैसा नेता और उनकी जैसी हस्ती, दुनिया में बहुत कम होती है और यही वजह है कि जब वह 14 वर्षों के देश निकाले के बाद ईरान आए तो लाखों लोगों ने उनका स्वागत किया, दसियों लाख लोगों ने अपना सब कुछ उन पर न्योछावर करने की क़सम खायी और जब वह इस दुनिया से सिधारे तो उनकी शवयात्र में भी दसियों लाख लोगों ने भाग लिया।
ईरान की इस्लामी क्रांति के विचारक शहीद मुर्तुज़ा मुतह्हरी, इमाम खुमैनी के व्यक्तित्व के बार में कहते हैं कि उस हस्ती के बारे में क्या कहूं जिसके बारे में बात करते समय मेरा बदन कांपने लगता है। एसा बहुत कम होता है कि किसी राष्ट्र की हर इच्छा, एक व्यक्ति में साक्षात नज़र आए।